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Tuesday, September 14, 2010

"स्वतंत्रता, निष्पक्षता एवं प्रजातंत्र"

क्या पूरी जनता कभी "स्वतंत्र एवं निष्पक्ष" हो सकती है ? "तटस्थता बुद्धि की आत्मा है" तन, इन्द्रिय, मन, बुद्धि ये स्तर हैं | और इन स्तरों के पार है "बुद्धि की आत्मा" जहाँ तटस्थता रहती है | "स्वतंत्रता एवं निष्पक्षता" विद्वत्ता के उच्च स्तर की संकल्पनाएँ हैं | इन्हें जनता के ६० % अभाव-ग्रस्त, ९५ % मात्र दसवी पढ़ी जनता पर प्रत्यारोपित कर उत्तम परिणाम प्राप्त करने की कल्पना कोई समझदार व्यवस्था कभी नहीं कर सकती है | यह कल्पना प्रजातंत्र ही कर सकता है | इसलिए इस की हत्या आवश्यक है |