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Monday, September 20, 2010

"‘प्रजा-प्रतिनिधि’ कभी नहीं हो सकते ब्रह्म प्रतिनिधि"

‘प्रजा-प्रतिनिधि’ हजारों अश्व शक्ति वाले विमानों के पांवों वाले हैं, शाही प्रीति भोजों से छकने वाले हैं, दूरदर्शन के चकाचौंधी कैमरों से, कैमरों की फ्लैश गनों से चमकने वाले हैं, दक्ष कमांडो से घिरे हुए हैं, रातों रात एक दम प्रजानन बन जाने वाले हैं। कमाण्डो सिंहों से घिरा बुलेट-प्रुफ पहना प्रजानन बुलेट-प्रुफ कार सफर करता, बुलेट-प्रुफ कांच घिरा भाषण देता है। उसका भोजन पहले कुत्ते, खरगोश, डॉक्टर खाते हैं। उनके न मरने पर यह प्रजानन भोग लगाता है। कायरों का कायर, भयभीतों में भयभीत, डरपोकों से डरपोक है प्रजानन। बुलेटप्रुफ कारों वाले हैं, बारह हजारी चश्मों वाले हैं, मिन्ट कोटों वाले हैं, ये किसीं भी स्तर आदमी नहीं हैं। ये किसी भी स्तर ब्रह्म प्रतिनिधि हो ही नहीं सकते हैं। ये सब ”प्रजा प्रतिनिधि“ प्रजानन प्रजातन्त्र की ही उपज हैं।