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Thursday, September 30, 2010

"अज्ञानबघारू है प्रजानन"

      अज्ञानबघारू है प्रजानन। न जानने पर भी उस विषय में धडल्ले से बकनेवाले को अज्ञान बघारू कहते हैं। इंजीनियरिंग, डॉक्टरी, वकीलीशैक्षिकी, वैज्ञानिकी, ज्ञानशून्य एवं अत्यल्पज्ञ होने पर भी इनके सम्मेलनों में आनतान रटे रटाए भाषण देने वाला व्यक्ति प्रजानन अज्ञानबघारू होता है। बघार कहते हैं संस्कार करने को। अज्ञान संस्कार रोपने वाले को अज्ञानबघारू कहते हैं।
            न भाजपा, न राजद, न कांग्रेस, न कम्युनिस्ट, न स.पा. आदि के किसी भी प्रजानन को वैज्ञानिक विधि की समझ है। वैज्ञानिक विधि विज्ञान की आत्मा है। पर सारे प्रजानन संस्कृतिकरण, भगवाकरण पर बिना समझे पक्ष विपक्ष में हजारों वक्तव्य अज्ञानबघारू हैं। इन्हें यह नहीं मालूम कि भारतीय संस्कृति की हर पुस्तक (नाटक काव्य भी) वैज्ञानिक विधि के प्रकृष्ट प्रयोग द्वारा ही लिखी गई है। अतः वैज्ञानिक ही है।