Thursday, September 23, 2010

"बरबादीआनन्दू हवाकू प्रजानन"

हवाकू प्रजानन। जो धरती पर पैर नहीं रखता वह हवाकू होता है। इसका ही दूसरा नाम विमानू, हेलीकॉप्टरू या उड़न-छू होता है। यह बरबादी से बड़ी दूर का आबादू होता है। बाढ़ बरबादी, भूकम्प बरबादी को हवाई जहाज से देखता है। इससे बरबादियां बड़ी अच्छी दीखती हैं और वह बरबादी पर दूरदर्शनी या हवाई (आकाशवाणियां) भाषण ज्यादा अच्छा दे सकता है। मोटी भाषा में कहा जाए तो यह बरबादी का आनन्द उठानेवाला बरबादीआनन्दू होता है।

"देशी ताल विदेशी अस्पताल और प्रजानन"

देशी ताल विदेशी अस्पताल। प्रजानन सारी उम्र देशी ताल देशी राग बजाता है। पर इलाज विदेशी अस्पतालों में सरकारी खर्चे से कराता है। ढाई करोड़ हर साल इतना मंहंगा इलाज पद गंवा भी कराता हुआ बकवास जीता है। इनके लिए विदेशी इलाज भारत बुलवाता है और झोपडियों में हजारों रामू, भीखू, सोनू, नीना, नोनी, सोहनी, मोनी, सुकटे बदन पिचके तन बेइलाज मर खप जाते हैं।

"बिन नौकरी पेंशन खाऊ हरामखोर प्रजानन"

बिन नौकरी पेंशन खाऊ हरामखोर है प्रजानन। सरकारी नौकर पैंतीस से चालीस साल नौकरी करता घिस जाता है तो पेंशन पाता है और प्रजानन दो वर्ष, पांच वर्ष मौज-मस्ती, सस्ती-सस्ती करके ताउम्र पेंशन सुविधाएं पाता है। धीरे-धीरे देश ऐसी सुविधाभोगियों से भर जाता है और बरबादियों के कगार पर पहुँच जाता है।

Wednesday, September 22, 2010

"फीता-काटू भत्ता-चाटू प्रजानन"

फीता-काटू भत्ता-चाटू ये उपाधियाँ हैं प्रजानन की। विद्यालय, उद्यान, भवन, केन्द्र, सड़क, बांध, उत्सव, दशगात्र, प्रसूति, मरघट फीता काटने दौड़ता भत्ता-चाटू मन्त्री है प्रजानन। जो प्रजानन जितना बड़ा, जो प्रजानन जितना ज्यादा फीता काटू उतना ही बड़ा बकवास टमाटर में कटहल लगाता, कटहल बीज को काजू बताता, दिमाग बेलगाम चलाता वह उतना ही बड़ा पद पाता यही प्रजातन्त्र तमाशा।

"अपने मुंह मियां मिट्ठू प्रजानन"

विज्ञापनी प्रोपेगेंड होता है प्रजानन। "अपने मुंह मियां मिट्ठू, पराए मुंह पूरा सिट्ठू" सरकारी पैसे, जनता के टैक्स काटे पैसे से बड़े बड़े पूरे समाचार पत्र बड़े पेज अपना थोबड़ा फोटू सज अपनी तथा अपनी सरकार के गीत गाता न अघाता; वास्तव में जिसका जमीन पर अस्तित्व नहीं वह पेपर, दूरदर्शन, विज्ञापनों में दिखाता। सौ बार चिल्लाकर बोला झूट जनता को सच लग जाता, पेपर टी.व्ही. को विज्ञापन दाता, उनका खरीददार हो जाता। वे भी इसे लालची हो छापते। बार बार दिखाता, आज तक दिखाता, जी दिखाता, स्टार दिखाता, दूरदर्शन दिखाता, जड़ थोबड़े का समाचार पत्र दिखाता।

"चापलूस प्रजानन"

दुमदार इन्सान का नाम है प्रजानन। आदमी के पीछे कोई दुम नहीं होती। लेकिन प्रजानन के पीछे लम्बी दुम होती है जो पूरे देश में हिलती डोलती है। तथा मालिक के प्रति वफा दर्शाती है। वह भरथरी की भाषा में लांगूल होता है। कुर्सी का कोना पाते ही मालिक (पार्टी अध्यक्ष) के तलवे चाटता है, दुम हिलाता है, उसकी जय बुलवाता है। मालिक प्रवक्ता हो जाता है फिर महाकवि, कभी मुख्यमन्त्री, कभी प्रधानमन्त्री हो जाता है। मालिक के ऊलजलूल को भी महा-ठीक कहता है। वह मालिक के प्रति सच्चा हां-वादी होता है। मालिक को अपनी चमडी का कोट पहनाने को, जूता पहनाने को भी तैयार होता है। मालिक के प्रति तन-मन-धन-जन (समर्थक जन) सहित दीन होता है। मक्खन, घी, स्निग्धता खाता नही, सतत लगाता है और अपनी तरक्की के रास्ते खुलवाता है, प्रमोशन पाता है। मालिक या मालकिन को फिर भी नहीं भूलता। और ज्यादा संसाधनों से अपने बकवासू कामों में भिड़ जाता है, मालिक के मरने का इन्तजार करता है और मालिक के मरने के बाद कभी कभी मालिक हो जाता है अर्थात् स्वयं प्रजानन हो जाता है।

Monday, September 20, 2010

"महाबकवासू प्रजानन"

महाबकवासू होना प्रजानन की विशेष योग्यता है। आन तान बातों को बकवास कहते हैं। प्रजानन वह है जो अन्धा है पर आंख पर भाषण देता है, अनपढ़ है पर शिक्षानीति तय करता है, शराबी होकर शराबबन्दी पर भाषण देता है, आर्थिक लाभ बटोरकर आर्थिक असमानता बढ़ाकर गरीबी हटाओ का नारा लगाता है। इंजीनियरिंग प्रशासनशून्य पर इंजीनियरिंग प्रशासन बखारता है। गृह-नियोजन अयोग्य होकर भी राष्ट्र-नियोजन की बात करता है। और उससे घटिया पेपर- उसका समाचार पत्र उसकी बातें महाबोल्ड करके छापती हैं।