Wednesday, September 22, 2010

"चापलूस प्रजानन"

दुमदार इन्सान का नाम है प्रजानन। आदमी के पीछे कोई दुम नहीं होती। लेकिन प्रजानन के पीछे लम्बी दुम होती है जो पूरे देश में हिलती डोलती है। तथा मालिक के प्रति वफा दर्शाती है। वह भरथरी की भाषा में लांगूल होता है। कुर्सी का कोना पाते ही मालिक (पार्टी अध्यक्ष) के तलवे चाटता है, दुम हिलाता है, उसकी जय बुलवाता है। मालिक प्रवक्ता हो जाता है फिर महाकवि, कभी मुख्यमन्त्री, कभी प्रधानमन्त्री हो जाता है। मालिक के ऊलजलूल को भी महा-ठीक कहता है। वह मालिक के प्रति सच्चा हां-वादी होता है। मालिक को अपनी चमडी का कोट पहनाने को, जूता पहनाने को भी तैयार होता है। मालिक के प्रति तन-मन-धन-जन (समर्थक जन) सहित दीन होता है। मक्खन, घी, स्निग्धता खाता नही, सतत लगाता है और अपनी तरक्की के रास्ते खुलवाता है, प्रमोशन पाता है। मालिक या मालकिन को फिर भी नहीं भूलता। और ज्यादा संसाधनों से अपने बकवासू कामों में भिड़ जाता है, मालिक के मरने का इन्तजार करता है और मालिक के मरने के बाद कभी कभी मालिक हो जाता है अर्थात् स्वयं प्रजानन हो जाता है।

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