Monday, September 27, 2010

"दशानन-प्रजानन-प्रजातन्त्र"

दशानन कहते हैं रावण को जिसमें बताया जाता है कि दस श्रेष्ठ व्यक्तियों का ज्ञान समाहित था। किन्तु परस्त्री भोगेच्छा के कारण अपने समस्त राक्षस कुल एवं राष्ट्र के लिए घातक-पातक था। नौ लाख वर्षों पूर्व के एक गधा सिर रावण को अपनी भूलों के लिए आज तक भी जलाया जाता आ रहा है। आज प्रजातन्त्र में प्रजाननों का बोलबाला है। येन केन प्रकारेण प्रजा के मतों से जीता लाखों गधासिरों से बना है सिर जिसका और इन गधा सिरों पर एक महाधूर्त सियार सिर सिरमौर है जिसका ऐसा दषानन से कहीं घातक, कहीं पातक एम.एल.ए., एम.पी., उपमन्त्री, मन्त्री, मुख्यमन्त्री,  प्रधानमन्त्री नामधारी व्यक्ति प्रजानन है। संक्षेप में प्रजा का आनन समाविष्ट है जिसमें वह एक आनन है प्रजानन। एक दशानन घातक था। इतने प्रजानन कितने घातक हैं? आइए थोडा विचार करें। प्रजाननों के अधिकार में दस नहीं अनेक आनन हैं। प्रधानमन्त्री ऊंगली की नोक पर मन्त्री बदल सकता है, सचिव बदल सकता है, दशानन के आनन नियत थे। प्रजानन के आनन परिवर्तनशील हैं। हां प्रधानमन्त्री अपनी पार्टी भी बदल सकता है, अपना आनन भी बदल सकता है। दशानन से कितना खतरनाक, भयानक है प्रजातन्त्र की उपज प्रजानन। अमेरिकी राष्ट्रपति महान प्रजानन के पास कोड शब्द हैं। जिन्हें दबाते ही दनदनाते परमाणु अस्त्र पूरे विश्व को काला कर दे सकते हैं, भून दे सकते हैं। सारी दुनियां को एक बार नहीं कई-कई बार मानव जाति से रहित किया जा सकता है। तकनीकी दृष्टि से यह सम्भव है।

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