Monday, September 20, 2010

"कैसे कैसे ये देशरत्न "

प्रजातन्त्र व्यवस्था में चूहा मत बटोर ले तो मुकुट का अधिकारी हो जाता है। कुत्ता मत बटोर ले तो वह राजसिंहासन पर बैठ जाता है। पर क्या मुकुट पहनने से, राजसिंहासन बैठने से इनकी आदतें कुतरनें, जूता काटने की छूटती हैं? प्रजातन्त्र व्यवस्था में चूहे को कुत्ते को हजारों पांव, हजारों हाथ, हजारों सिर दे दिए जाते हैं वह प्रजानन हो जाता है। और कालान्तर में इन हाथों का यदि वह पांच प्रतिशत भी प्रयोग कर लेता है तो उसे कुछ बौने प्रजानन देशरत्न, देशसपूत की उपाधियां दे दिया करते हैं।

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