Monday, September 20, 2010

"हाथी तन चूहा मन" कायरों का कायर प्रजानन

हाथी तन चूहा मन प्रजानन। जितना बड़ा प्रजानन होता है उतना ही बड़ा वह चूहा मन हाथी तन होता है। एक चूहा कल्प बादल की छांह तले धोखे से प्रार्थना कर हाथी तन हो गया था। फिर वह सारे जंगल के जानवरों को दूसरे जानवरों से बचाने लगा। खरगोष ने कहा मुझे कुत्ते से भय लगता है। हाथी तन ने कुत्ते को हड़का दिया। हिरण ने कहा मुझे भेड़िये से डर लगता है। हाथी तन ने भेडिये को हडका दिया। चूहे ने कहा मुझे भी एक जानवर से डर लगता है। हाथी तन बोला कौन है अभी भगाता हूँ । उसने हुंकार भरी। चूहे ने कहा वो आ रही है। हाथी तन ने बिल्ली को आते देखा। चूहा मन हाथी तन थर-थर कांपने लगा और भाग गया।

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