विज्ञापनी प्रोपेगेंड होता है प्रजानन। "अपने मुंह मियां मिट्ठू, पराए मुंह पूरा सिट्ठू" सरकारी पैसे, जनता के टैक्स काटे पैसे से बड़े बड़े पूरे समाचार पत्र बड़े पेज अपना थोबड़ा फोटू सज अपनी तथा अपनी सरकार के गीत गाता न अघाता; वास्तव में जिसका जमीन पर अस्तित्व नहीं वह पेपर, दूरदर्शन, विज्ञापनों में दिखाता। सौ बार चिल्लाकर बोला झूट जनता को सच लग जाता, पेपर टी.व्ही. को विज्ञापन दाता, उनका खरीददार हो जाता। वे भी इसे लालची हो छापते। बार बार दिखाता, आज तक दिखाता, जी दिखाता, स्टार दिखाता, दूरदर्शन दिखाता, जड़ थोबड़े का समाचार पत्र दिखाता।
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